For those who don't understand hindi. read my english version 'I AM ALIVE'.
http://madhvi-k.sulekha.com/blog/post/2008/05/i-am-alive.htm
वो दिन भी क्या दिन थे
तसवीर उतारा करते थे
रेतों पर महलों के सपने
आंखों मे बसते हलके से
दिल के परदे पे छप छप करते
पानी के छींटे पड़ते थे
तस्वीर उतारा करते थे

बालों मे बंधे रेशम धागे
आंखों मे सुनहरी ख्वाब लिए
लब पर उतरती धूप सहज
सपनों को सवारा करते थे
तस्वीर उतारा करते थे
वो पल गुम हो गए पानी मे
लहरों के साथ समुंदर मे
याद तुम्हारी हर पल आती
रात चाँदनी जब होती
दिल बेजान सम्भाला करते थे
प्यार तुम्ही को करना था
इकरार तुम्ही से करना था
सूरज छुपता या उगता हो
बस नाम पुकारा करते थे
हर रोज जिए और मरते थे
फिर से किस्मत ने करवट ली
फिर से सावन की हवा चली
फिर से मुस्काई कली नई
फिर से उग आए फूल वहां
जहाँ चमन उजड़ा करते थे
तुम उतरीं इस धरती पर
पेरों को हलके से रखना
ये जमीन नहीं मेरा दिल है
फूल ही फूल अब महकेंगे
वीराने कभी जहाँ बसते थे

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